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महेंद्र बेनीपुरी के यादों के झरोखे से “रामवृक्ष बेनीपुरी जी”

पिता के संघर्ष भरे जीवन यात्रा की गाथा महेंद्र बेनीपुरी ने दर्शकों और श्रोताओं से खाचा-खाच भरे सभागार में अपने मुखारबिंदू से सन 2009 में इंडियन ट्रांसलेशन एसोसिएशन द्वारा आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस में जब सुनाया तो उस महान विभूति के वैभवशाली अतीत को याद कर सभागार में उपस्थित सभी लोगों की आँखे नम हो गई थी. महेंद्र बेनीपुरी जी ने अपने यादों के झरोखों से लफ़्जों के सहारे आहिस्ता-आहिस्ता रामवृक्ष बेनीपुरीके जीवन की बहुरंगी धाराओं को एकत्र समेटकर उनके विलक्षण व्यक्तित्व को बयां करके सभी को बहुत गहरे ख्यालों में छोड़ दिया था. आप जब इस आडिओ-विडियो को देखेंगे तो आप भी बेनीपुरी जी के मुतमईन हो जायेंगे. 

महेंद्र जी अपने पिता रामवृक्ष बेनीपुरीजीको याद करते हुए कहा था की मेरे पिताजी  आम्रपाली नाटक में पुष्पगंधा नामक पात्र को रचा था और उस पुष्पगंधा से एक संवाद बोलावाया है  – “ जीवन की सार्थकता मनमाना जीना या लम्बी आयु पाना नहीं है. ज़िंदगी की सार्थकता है किसी बड़े काम के लिए उत्सर्ग  किया जाना. फिर उत्संग की हुई ज़िंदगी एक दिन की हो या सौ वर्ष की हो.”  रामवृक्ष बेनीपुरी जी अपने वास्तविक जीवन में भी इसी मन्त्र का पालन किया था. इस महान भारतीय  विभूति ने जो भारतीय साहित्य जगत को अपना अमूल्य योगदान दिया है उसको कभी भी इतिहास नहीं भुला सकता है. केवल साहित्यिक योगदान ही नहीं बल्की एक सामाजिक, देशभक्त, राजनैतिक योगदान को हम कभी नहीं भुला सकते हैं. इस वीर पत्रकार, कहानीकार, व्यंगकार, नाटककार, उपन्यासकार और दार्शनिक के बारे में  राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने कितना सच कहा था – “नाम तो मेरा दिनकर है पर असल सूर्य तो बेनीपुरी थे." यही तक नहीं बेनीपुरी जी अपने निराले कर्तव्यों से अपने गाँव का नाम तो उजागर न किया हो-उसकी उज्जवल कीर्तिलता की सुगन्ध कहाँ किस क्षेत्र में न फूटी ! कि बिहारवासियों का मस्तक गौरव से उन्नत हुआ. प्रसिद्ध यायावर देवेन्द्र सत्यार्थी के शब्दों में, “बिहार ही नहीं पूरा भारत रामवृक्ष बेनीपुरी पर गर्व करता है.आज इक्कीसवीं सदी के शुरुआत में हिन्दी सेंटर संस्थान भी अपने-आप को गौरवान्वित महसूस करता है कि  रामवृक्ष बेनीपुरी जी भारत के मातृभूमि और यहाँ के देशवासियों के लिए त्याग और राष्ट्रभक्ति के  खातिर. 

Terminology Guru Dr. Gabriele Sauberer in India

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During her visit to India, Gabriele dealt with the following three questions:

1. What is the role of terminology and terminology management in quality assurance?

2. How to measure the quality of translations & translation service providers?

3. What does the new European Standard EN 15038:2006 on “Translation services – Service requirements” say about terminology?

Increasingly quality standards and international certification is required by government, industry and public procurement. Gabrielle discusses some of the main success factors in the translation and language industries, with a focus on terminology and terminology management. After a short introduction of quality issues in general, she showed how terminology is represented in the new European standard EN 15038 and how translators, terminologists and translation service providers can prepare to meet the expectations of their customers. Gabrielle along with Peter Jonas and Anja Drame presented a workshop about The Language Industry Certification System LICS® - a new global brand for certification in the language and translation industry.

Prof. Roger T Bell in India

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Pioneer of Translation Theory and Professor, University of Westminster, UK and Honorary Fellow of the Charted Institute of Linguists. Professor Bell presented a workshop on Professionalization of Translation Profession and made a keynote address on "Translation as Social Service and Professional Activity". His 1991 book Translation and translating: theory and practice has been translated into Romanian (2000), Korean (2001), Chinese (2005) with Russian and Malay translations in the press and he plans for a Hindi version in the near future. Contemporary of Noam Chomsky, Prof. Bell has spent quite a considerable period in India.