तनु वेड्स मनु रिटर्न्स

तनु वेड्स मनु रिटर्न्स ****
निर्देशकः आनंद एल राय tanu weds manu2 राइटर: हिमांशु शर्मा
सितारेः कंगना रनौत, आर माधवन, दीपक डोबरियाल, जिमी शेरगिल
छायांकन: चिरंतम दास 
गीत: राजशेखर 
संगीत: क्रसना सोलो एवं तनिष्क-वायु
बैकग्राउंड स्कोर: क्रसना सोलो  
संपादन: हेमल कोठारी 


पीकू के बाद बॉक्स ऑफिस पर अगर किसी फिल्म ने थियेरेटिकल ट्रेलर दिखा कर अपने काया-माया की शक्ति से सममोहित कर थियेटरों तक दर्शको को खीचा है तो तनुजा त्रिवेदी की सौतन दत्तों ने. दत्तों बोले तो कुसूम सांगवान मल्लब कंगना राणावत ने. जी हाँ ! आप भी इस बात के मुतमईन हो जायेंगे, जब दात्तो से रुपहले पर्दे पर रूबरू होंगे. 2011 में आई तनु वेड्स मनु में आप सब जिस तनूजा को देखें है जो बिंदास और अपने बिगड़ी हुई रेप्युटेशन के कारण आपके दिलो में जगह बने थी, वही इस बार  तनु वेड्स मनु रिटर्न्स में कंगना दात्तो उर्फ कुसूम के किरदार में दिल से भोली, दिमाग से समझदार और जुबान की साफ दिखती है. जिसका सपना एथलीट बनाना है.

फिल्म की ओपनिंग रुपहले पर्दे जैसे ही होती है ये मालूमात पड़ता है कि तनु और मनु शादी के चार बसंत बड़ी नोक-झोक से गुजरे है. जिससे दोनों के रिश्ते से अदरक की बदस्तूर कसाव आने लगी है जो यह बताने को काफी है कि अब इस पत्ती-पत्नी के रिश्ते से कैसे पिंड छुड़ाया जाये. इंग्लैंड में उपजे इस विवाद ने तनु को मौका दे देता है और तनु उस हद तक पाहून जाती है कि यहाँ तक कि वो मनु को पागल करार दे देती है और मनोचिकित्सकों के द्वारा उसे सर्टिफाइड मनोरोगी घोषित करवा देती है और उसे मेंटल हॉस्पिटल में भारती करवा के इंडिया के लिए फुर्र हो जाती है.  फिल्म की कहानी को फिल्म के राइटर हिमांशु शर्मा यही से आगे बढ़ाते है. तारीफ-ए-काबिल है हिमांशु कहानी के प्लाट को बड़े ही कसावट के साथ आगे गढ़ने के लिए. फिल्म की कहानी वन लाइनर है, साथ में कहानी की असली हीरो दात्तो कही भी ढीली-ढाली नहीं है.

अब बात करते है निर्देशन की. आनद एल राय ने जिस तरह से फिल्म के स्टोरी और किरदारों के साथ न्याय करते हुए फिल्मांकन किया है. चाहें वो दिल्ली हो या कानपूर या हरियाणा सब को पूरी सजगता के साथ
जीवन की बहुरंगी धाराओं को एकत्र समेटकर उनके विलक्षण व्यक्तित्व को बयां करते हुए सभी को बेहद सरसरी धुन के साथ शाम के पहले सितारों में प्यार के झिझकती बूंदा-बांदी से छुआ कर बेहद तपती दुपहरी में मिसमैच्ड किरदारों के वैवाहिक जीवन की कहानी के साथ बहुत गहरे ख्यालों में छोड़ देते हैं. यही कॉनट्रास्ट फिल्म को एक ऊंचाई पे ले जा के दर्शकों के लिए छोड़ दिया है.

अब बारी आती है फिल्म के किरदारों की जो अपनी-अपनी भूमिकाओं में फिट बैठते हैं. दात्तों ने हिंद्दे सिनेमा जगत को यह संदेश दिया है कि अभिनय की दुनिया में कोई दूसरी कुसूम नहीं हो सकती. कंगना राणावत ने अपने अभिनय की जो केसर फिल्म जगत में घोली है उससे यही कहा जा सकता है कि यह बन्नो का समय है. आर माधवन अपने किरदार को सशक्त जिया है. राजा अवस्थी यानी जिम्मी शेरगील, चिंटू यानी मोहम्मद जीशान अयूब इन किरदारों के माध्यम से अपने को फिर से अभिनय की दुनिया में स्थापित कर दिया है और एक तरफ मनु का बेस्ट फ्रेंड पप्पी यानी दीपक डोब्रियाल जिन्होंने अपने किरदार के मूमेंट्स को अपने अभिनय कौशल से अच्छे सलीके से सवांरा है.

फिल्म का छायांकन चिरंतम दास ने संजीदगी के साथ किया है, संगीत तो सुरीले है ही जिसे पिरोया है क्रसना सोलो और तनिष्क-वायु ने. राजशेखर के लिखे हुए गीत तो सभी के जुबान पे बैठा हुआ है. किसी भी फिल्म का कमर उसका बैकग्राउंड स्कोर होता है जो उसे दर्शकों के दिलो-दिमाग में उठने-बैठने में मदद करता है. इस फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर फिट है जिसे कंपोज़ किया है क्र्सना सोलो ने. इन सभी यूनिट को जो हैंडल कर ले उसे डायरेक्टर बोलते हैं जो इस कसौटी पे आनद अल राय खरे उतरे हैं. यहाँ तक कि फिल्म अगर असल में बनती है तो एडिटर के टेबल पे. यहाँ भी आनद ने बखूबी स्मार्ट वर्क करवाया है एडिटर हेमल कोठारी से . हेमल ने फूटेज को सही से सजाया कर रील को स्टोरी के अनुसार दौड़ाया. कुल मिलाकर आपसब दात्तो के शादी में मेहमान बन सकते हैं. मेहमान नवाजी के लिए साफ दिलवाली दात्तो बोले आपसब की गुडिया कुसूम आपका थियेटरों में रुपहले पर्दे पे इंतजार कर रही है. अरे ! आप अभी-भी लेट नहीं हुए हैं. झट से लपक लीजिये शादी को. दात्तो, ओह ! नो ! कुसूम गुडिया मेरे तरफ से शादी के लिए ढेरों मुबारका !  

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