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शब्दों की अलग ही मोहक दुनिया

डॉ. महेश परिमल

शब्दों का सौंदर्य अद्भुत होता है। जब भी हमारे सामने कुछ शब्द विशेष सामने आते हैं, तो हम उस पर एक तरह से फिदा ही हो जाते हैं। मुँह से अनायास ही निकल जाता है कि वाह क्या शब्द है। शब्द और भाषा का अपना विशिष्ट शास्त्र है। शब्द समय के साथ बनते रते हैं, साथ ही इतिहास के गर्त में गुम भी होते रहते हैं। एक ओर जहां अंगरेजी के एक-एक शब्द पर शोध होते रहते हैं, वही दूसरी ओर अन्य भाषाओं के लिए यह जुनून नजर नहीं आता। हाल ही में आक्सफोर्ड वर्ड ऑफ द ईयर के रूप में ‘सेल्फी’ शब्द का चयन किया गया है। इस शब्द का आशय है कि  मोबाइल या कैमरे से अपनी ही तस्वीर लेकर उसे फेसबुक या अन्य किसी विशेष मीडिया साइट पर अपलोड करना। हर वर्ष वर्ल्ड ऑफ इयर की स्पर्धा में नए-नए शब्दों का समावेश किया जाता है। जिस शब्द का चयन होता है, उसे शब्दकोश में स्थान मिलता है। यह सब देखकर और जानकर ऐसा लगता है कि इस तरह के कार्य यदि हमारी भाषा में हो, तो कितना अच्छा हो।
शब्द जीवंत हैं, क्योंकि इसे हम बोलते, लिखते और पढ़ते रहते हैं। हर शब्द अपने आप में एक मुहावरा होता है। हर शब्द की अपनी पहचान होती है। हर शब्द अपने आप में इतिहास को संजोया हुआ होता है। शब्द में इतिहास ही नहीं, बल्कि वर्तमान के दर्शन होते हैं। आश्चर्य यह है कि शब्द का भूगोल भी होता है, क्योंकि कुछ शब्द केवल कुछ ही देश अथवा राज्य में ही प्रयुक्त होते हैं। नए शब्दों का जन्म होता रहता है। हमेशा नए-नए शब्द अस्तित्व में आते रहते हैं। यह भी सच है कि शब्दों की मौत भी होती है। काल के शब्द रसातल में चले जाते हैं और लुप्त हो जाते हैं। कितने ही शब्द निजी होते हैं। अक्सर प्रेयसी अपने प्रियतम को एक विशेष नाम से पुकारती है। प्रेमी भी ऐसा ही करते हैं। पति और पत्नी के बीच भी वार्तालाप में कुछ शब्द ऐसे होते हैं, जिसका अर्थ वह नहीं होता, जिसका अर्थ साधारणतया वही होता है। ऐसे शब्द या नाम लीविंग सर्टिफिकेट या पासपोर्ट में नहीं होते। केवल दिल में ही होते हैं। कुछ शब्द इतने निजी होते हैं कि किसी व्यक्ति विशेष की उपस्थिति में ही बोले जाते हैं। महामहिम शब्द राष्ट्रपति या राज्यपाल के लिए ही प्रयुक्त होता है। मी लार्ड योर ऑनर आदि शब्द केवल अदालत में न्यायमूर्ति के लिए प्रयुक्त होते हैं। शब्द घिसते हैं, पिटते हैं और नए शब्दों की रचना के लिए मार्ग दिखाते हैं। देखते ही देखते लाइब्रेरी कब रायबरेली हो गया, हमें पता नहीं चला। रेफ्रिजेरेटर, फ्रिज और टेलीविजन टीवी हो गया, हमें पता ही नहीं चला।
भाषाशास्त्री शब्दों और वाक्यों पर घात लगाकर बैठे होते हैं। वे उस शब्द की व्युत्पत्ति से लेकर उसके विसर्जन तक का हिसाब रखते हैं। कहा जाता हे कि चार कोस पर पानी बदले और चार कोस पर बानी। हिंदी को ही ले लीजिए, वही हिंदी उत्तर प्रदेश में कुछ और तरीके से बोली जाती है, और मध्यप्रदेश में कुछ और तरीके से। पंजाब की हिंदी और बंगला की हिंदी में जमीन आसमान का अंतर है। इसी तरह छत्तीसगढ़ी रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव आदि में विभिन्न स्वरूपों में मिलती है। इस वर्ष ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईयर 2013 में ‘सेल्फी’ का समावेश किया गया है। यह शब्द पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 17 हजार बार अधिक प्रयुक्त हुआ है। शब्दों पर शोध ऐसे ही नहीं होता। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी उसके लिए रिसर्च प्रोग्राम बनाती है। ‘सेल्फी’  इंटरनेट पर सबसे अधिक प्रयुक्त हाने वाले शब्दों में से है। आक्सफोर्ड डिक्शनरी के संपादक जुडी पियरसल का कहना है कि सामाजिक, राजनैतिक और तकनीक बदलाव से शब्द भी आकार प्राप्त करते हैं। शब्द जुड़ते हैं, बिखरते हैं, नए बनते हैं और पुराने लुप्त हो जाते हैं। यह सब लोगों द्वारा ही होता है। माँ के स्थान पर मम्मी, मॉम या मम्मा शब्द आ गए, आपको पता चला? पिताश्री या पापा का स्थान पर पप्पा ने ले लिया। अब पप्पा का स्थान डेड ले रहा है। हमें पता ही नहीं चलता कि भाषा बदल रही है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने एक शब्द दिया है-अफरा-तफरी, यह शब्द इतना अधिक प्रचलित हो गया है कि हर कोई आपाधापी के लिए इसी शब्द का प्रयोग कर रहा है। जिम को आज जिम के रूप में ही कहा जाता है, किसी को व्यायामशाला या कसरत स्थल कहते कभी सुना है आपने? क्रीडांगन अब ग्राउंड बन गया है।
अब फिर आते हैं शब्द ‘सेल्फी’  पर। आज की पीढ़ी शायद ही इस शब्द से अपरिचित हो। सभी ऐसा ही करने लगे हैं। अपनी ही तस्वीर अपने मोबाइल या कैमरे से खींचते हैं, फिर उसे सोशल साइट्स पर अपलोड कर देते हैं। इस कार्य से अब सेलिब्रिटिश भी बच नहीं पाए हैं। 2002 में सबसे पहले ऑस्ट्रेलियन फोरम में ‘सेल्फी’ शब्द का प्रयोग किया गया था। 2004 में क्लिकर्स वेबसाइट पर हैगटैग के लिए ‘सेल्फी’ का प्रयोग किया गया। फिर 2012 तक फिर इसका उपयोग अधिक नहीं हो पाया। 2012 में सोशल मीडिया पर सेल्फ पोर्टेट फोटोग्राफ्स का शार्टकट रूप ‘सेल्फी’ शब्द उपयोग में लाया गया। उसके बाद तो इसका बेपनाह प्रयोग होने लगा। सोशल मीडिया पर क्रिश्चियन धर्मगुरु  पोप के साथ यंगस्टर्स की एक तस्वीर खूब शेयर की गई। इस तस्वीर ने ‘सेल्फी’ शब्द के प्रयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस समय ‘सेल्फी’  के अलावा दो अन्य शब्द स्पर्धा में थे। इसमें से एक शब्द है ‘ट्वर्क’ और दूसरा है‘बिंगवाय’। यह शब्द ट्वर्क माइली सायरस के सेक्सी डांस के एक स्टेप का नाम है। बिंगवाय यानी अधिक समय तक टीवी देखना। इन दोनों शब्दों के साथ लड़ाई में ‘सेल्फी’  जीत गया। इस शब्द का समावेश अभी ऑक्सफोर्ड की ऑनलाइन डिक्शनरी में दिखाई नहीं दे रहा है, शायद कुछ समय बाद दिखाई देने लगे। 
पिछले साल का विजेता शब्द था ओम्नीशैबल्स
वष 2012 में ऑक्सफोर्ड ऑफ द ईयर के रूप में जिस शब्द का चयन किया गया वह शब्द था ओम्नीशैबल्स। इस शब्द का अर्थ होता है ऐसी स्थिति, जिसमें कुछ भी सच्चई नहीं, शुरू से आखिर तक गड़बड़झाला। ए सिचुएशन विचइज सेम्बोलिक फ्राम एवरी पॉसिबल ऐंगल मिन्स ओम्नीशैबल्स। यह शब्द सबसे पहले 2009 में बीबीसी के पॉलिटिक्स सटायर के कार्यक्रम ‘द थिंक ऑफ इट’ में प्रयुक्त किया गया था। उसके बाद तो यह शब्द बोलचाल की भाषा में ही शामिल हो गया। ब्रिटिश पार्लियामेंट में विपक्ष के नेता एड मिलिबेड ने संसद की कार्यवाही के दौरान ओम्नीशैबल्स शब्द का इस्तेमाल किया था। इसे संसद के मिनिट्स में भी शामिल कर लिया गया। इसके बाद तो सरकार पर आरोप लगाने और उसकी बुराई करने के लिए यह शब्द खूब लोकप्रिय हुआ। इतना ही नहीं, इस शब्द को जोड़कर नए शब्द भी बनने लगे।  रोम की प्रेसिडेंट के चुनाव अमेरिका के मिट रोम प्रत्याशी थे, इस दौरान वे लंदन गए, तब उन्होंने आम सभाओं में कई तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया, इन सभी को रोम्नीशैवल्स के रूप में आज भी जाना जाता है। 2012 में कई अन्य शब्द भी स्पर्धा में थे। इसमें यूरोगेडॉन, ममीपोर्न, ग्रीन ऑन ब्ल्यू, गेम्समेकर, सेकंड स्क्रिनिंग आदि शामिल हैं। यूरोजोन को यूरोगेडोन कहा जाता है। यह शब्द 50 शेड्स नाम किताब से लिया गया। लंदन ओलिम्पिक वालेंटियर के रूप में काम करने वाले लड़कों-लड़कियों के लिए गेम्स मेकर जैसा शब्द काम में लाया गया। सेकंड स्क्रिनिंग शब्द का मतलब होता है टीवी देखते-देखते मोबाइल या टेबलेट का इस्तेमाल करना।
अंगरेजी के अन्य शब्दों की रोचक बातें
फेसबुक और दूसरे अन्य मीडिया साइट्स से किसी को हटा दिया जाता है, तो उसे हमें कहते हैं कि मैंने आपको अनफ्रेंड कर दिया। यह अनफ्रेंड शब्द भी बहुत पुराना नहीं है। 2009 में ऑक्सफोर्ड वर्ल्ड ऑफ द ईयर के रूप में इस शब्द का चयन किया गया था। उस समय डिक्शनरी में साइंटिस्ट क्रिस्टन लिंडबर्ग ने कहा था कि शब्द की दृष्टि से अनफ्रेंड शब्द धारदार है। हाल में हलो शब्द पर जो शोध सामने आया है, वह भी बहुत ही मजेदार है। हलो ग्राहम बेल की गर्लफेंड का नाम था, जब उन्होंने टेलिफोन का अविष्कार किया, तो सबसे पहले इसी शब्द का इस्तेमाल किया। आज यह शब्द सबसे अधिक बोला जाता है। हलो के बाद सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है ओ के। इस शब्द के बारे में यह कहा जाता है कि अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति एण्ड्रुज जेक्शन आल करेक्ट शब्द को संक्षिप्त रूप में ओके कहते। तभी से इस शब्द का प्रचलन शुरू हुआ। इस शब्द को लेकर अन्य कई कहानियां भी प्रचलित हैं। कहते है कि अमेरिका के रेल्वे स्टेशन में काम करने वाला एक क्लर्क ओबडिया केली सभी पार्सल की जांच के बाद अपने ही नाम का संक्षिप्त रूप ओके लिख देता था। इससे यह शब्द काफी प्रचलित हुआ। कई लोग इस शब्द को रेड इंडियन की देन मानते हैं।
इस तरह से देखा जाए, तो शब्दों की अपनी अलग ही दुनिया है, जहां वे प्रचलित होकर घिसते-पीसते हुए रसातल में समा भी जाते हैं। कुछ शब्द अमर हो जाते हैं। इसके पीछे किसी व्यक्ति विशेष का आग्रह भी हो सकता है। कुछ लोगों के तकिया कलाम भी नए शब्दों को जन्म देते हैं। पर सच तो यह है कि जहां शब्द हमें बेधकर रख देते हैं, वहीं यह राहत पहुंचाने वाले भी होते हैं। हर शब्द अपने आप में एक मुहावरा है। एक शब्द से युद्ध और शांति का सबक मिल सकता है। इसलिए इसका उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाए, तो ही बेहतर।

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