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भाषा और शिष्टता

pran sharmaएक जगह एक फिल्म की शूटिंग हो रही थी। किसी हिंदी फिल्म की  आउटडोर शूटिंग हो और दर्शकों की भीड़ नहीं उमड़े ये मुमकिन ही नहीं है।  इस फिल्म की आउटडोर शूटिंग के दौरान भी कुछ ऐसा ही हुआ। लोग भारी संख्या में उमड़े। किसी उत्सव के वातावरण के जैसा लग रहा था सब  कुछ। भीड़ में एक अँगरेज़ भी थे। 
 
पाँच मिनटों के एक दृश्य को बार - बार फिल्माया जा रहा था। अँगरेज़ महोदय उकताने लगे। वे लौट जाना चाहते थे लेकिन फिल्म के हीरो के कमाल का अभिनय उनके पैरों में ज़ंज़ीर बन गया था। 
 
आखिर फिल्म की शूटिंग पैक अप हुयी। अँगरेज़ महोदय ने शुक्र मनाया। वह हीरो की ओर लपके। उससे मिलते ही उन्होंने कहा - " वाह भाई , क्या उत्कृष्ट अभिनय है आपका ! देख कर आनंदित हो गया हूँ। मेरी बधाई और शुभ कामना स्वीकार कीजिये। "
     
        " Thank you very much . "  हीरो ने जवाब में कहा। 
       
        " क्या मैं पूछ सकता हूँ कि भारत के किस प्रदेश से आप हैं ? "
 
        " I am from Madya Pradesh . "
 
        " यदि मैं मुम्बई आया तो क्या मैं आपसे मिल सकता हूँ ?
 
        " of course , You can see me ."
 
"इसके पहले कि  विदा लूँ , मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूँ। आपसे मैंने आपकी भाषा में प्रश्न किये  किन्तु आपने उनके उत्तर अंग्रेज़ी में दिए , ऐसा क्यों ? "
 
" देखिये , आपने हिंदी में बोल कर मेरी भाषा का मान बढ़ाया , क्या मेरा कर्तव्य नहीं था कि अंग्रेज़ी में बोल कर मैं आपकी भाषा का मान बढ़ाता ? "
 
                                                 प्राण शर्मा , यू के 
 

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