Hindi Poems

उदास मन - बिटिया की यादों में

Dinesh

उदास मन

कैसे कहूँ कि मन उदास है ?

तुझसे मिलने की आस है |

मन में, तेरी शरारतों की तस्वीर बनाता हूँ,

बस तेरी आवाज़ सुनकर मुस्कुराता हूँ |

और अपने-आप को समझाता हूँ |

यहाँ दूर रहकर, तेरे लिए ही तो कमाता हूँ |

नानी तुझे नहलाती होंगी,

नाना सैर कराते होंगे,

माँ की ममता जारी होगी,

घर में फैली उजियारी होगी |

खिलौनों का लगा अम्बार होगा,

बिटिया (नेत्री), उनपर तेरा ही अधिकार होगा |

तुझे क्या पता, मेरे लिए तू कितनी खास है ?

तुझसे दूर यहाँ मेरे लिए वनवास है |

तेरा साथ, एक मीठा एहसास है,

मानो मिल गया स्वर्गवास है |

आने वाले, पर्व-त्योहारों की तलास है,

छुट्टी लेकर घर आने की आस है |

कैसे कहूँ कि मन उदास है ?

तुझसे मिलने की आस है |

                     दिनेश कुमार, १ मार्च २०१४

बिलखता बचपन

सुना है यह मेरा बचपन है,

घर वालों का प्यार समर्पण है |

खुद पर होता नहीं यकीन है,

यहाँ तो बदली हुई जमीन है |

माँ की बची हुई पढ़ाई है,

पिता को करनी अभी कमाई है|

माँ छुपकर कॉलेज को निकल जाती है,

महीनों, पिता की तस्वीर ही दिखाती है |

घर वाले खेल-खिलौनों में उलझाते है,

रुक-रुक कर दूध की बोतल दिखाते हैं|

अभी, ठीक से बोलना भी नहीं आया है,

फिर भी, मैंने विरोध जताया है |

देख इसे, माँ ने गले लगाया है,

पिता ने भी खिलौने भिजवाया है |

कहते हैं लोग - लड़कपन है,

अपना तो बिलखता बचपन है |

दिनेश कुमार, १० १७ अगस्त २०१४

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