खोना चाहता हूं

खोना चाहता हूं

आज मैं तुम पर

अपना दिल वार कर

सब कुछ खोना चाहता हूं

हां मैं तुमसे दोस्ती

बस दोस्ती करना चाहता हूं।

आंखे तुम्हारी समुन्द्र हैं

लहरों की मौजें इनमें हैं

उन लहरों में डुबकर मैं

उस किनारे पहुंचना चाहता हूं

हां मैं तुमसे दोस्ती

बस दोस्ती करना चाहता हूं।

तुम्हारे ऊंचे लंबे कद को मैं

बना मन मंदिर में देवता

उस देव के मनोहर रूप को

हाथों से पूजना चाहता हूं।

हां मैं तुमसे दोस्ती

बस दोस्ती करना चाहता हूं।

        -0-            नवल पाल 

 

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