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अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए

By Kusum Vir 

give backअँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए

​​​रो​शन करो तुम इस जग को इतना 
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए 
दीपों कि माला सजे द्वार सबके 
कोई घर तिमिर से ढका रह न पाए नेहों से पूरित हो दीपों कि बाती 
नफ़रत की  आँधी बुझाने न पाए 
सुरीली हो  सरगम सुप्रीत इतनी 
वितृष्णा के स्वर इसमें मिलने न पांएँ 
न वैरों कि बस्ती हो आपस के झगड़े 
दीवारें मज़हब की खड़ी हो न पाएँ 
उड़ेलें सुधारस इतना ज़मीं परप्यासा कोई फ़िर कहीं रह न पाए 
निर्मल यह मन हो दरिया के जैसा 
समन्दर सा खारा यह होने न पाए 
माँगूँ दुआएँ प्रभु से मैं हरदम 
कपट द्वेष मन में कहीं रह न जाए 
अपरिमित है साम्राज्य जिसका गगन में 
जलाता जो दीपक अनगिन आसमां में 
अद्भुत है सत्ता महा उस प्रभु की 
मन प्राण जीवन उसी में रमाएँ 
ये कोठी, ये बँगले बहुत हैं सजाए
ग़रीबों कि बस्ती उजड़ने न पाए 
तृप्ति से पूरित हों हर जन हमेशा  
शोषित धरा पर कोई रह न जाए 
दुखाओ कभी मत दिल तुम किसी का 
आह से उसकी कभी बच न पाए 
जलाओ ज़रा प्रेम कि अमर ज्योति 
अँधेरा किसी मन में रहने न पाए            कुसुम वीर 
 

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उदास मन - बिटिया की यादों में

Dinesh

उदास मन

कैसे कहूँ कि मन उदास है ?

तुझसे मिलने की आस है |

मन में, तेरी शरारतों की तस्वीर बनाता हूँ,

बस तेरी आवाज़ सुनकर मुस्कुराता हूँ |

और अपने-आप को समझाता हूँ |

यहाँ दूर रहकर, तेरे लिए ही तो कमाता हूँ |

नानी तुझे नहलाती होंगी,

नाना सैर कराते होंगे,

माँ की ममता जारी होगी,

घर में फैली उजियारी होगी |

खिलौनों का लगा अम्बार होगा,

बिटिया (नेत्री), उनपर तेरा ही अधिकार होगा |

तुझे क्या पता, मेरे लिए तू कितनी खास है ?

तुझसे दूर यहाँ मेरे लिए वनवास है |

तेरा साथ, एक मीठा एहसास है,

मानो मिल गया स्वर्गवास है |

आने वाले, पर्व-त्योहारों की तलास है,

छुट्टी लेकर घर आने की आस है |

कैसे कहूँ कि मन उदास है ?

तुझसे मिलने की आस है |

                     दिनेश कुमार, १ मार्च २०१४

बिलखता बचपन

सुना है यह मेरा बचपन है,

घर वालों का प्यार समर्पण है |

खुद पर होता नहीं यकीन है,

यहाँ तो बदली हुई जमीन है |

माँ की बची हुई पढ़ाई है,

पिता को करनी अभी कमाई है|

माँ छुपकर कॉलेज को निकल जाती है,

महीनों, पिता की तस्वीर ही दिखाती है |

घर वाले खेल-खिलौनों में उलझाते है,

रुक-रुक कर दूध की बोतल दिखाते हैं|

अभी, ठीक से बोलना भी नहीं आया है,

फिर भी, मैंने विरोध जताया है |

देख इसे, माँ ने गले लगाया है,

पिता ने भी खिलौने भिजवाया है |

कहते हैं लोग - लड़कपन है,

अपना तो बिलखता बचपन है |

दिनेश कुमार, १० १७ अगस्त २०१४

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Sneh Thakore Patron of Hindi Center receives President Award

Proud Moment for Hindi Center. Our Patron Mrs. Sneh Thakore, editor and publisher "Vasudh" receives President Award for her outstanding contribution in promoting Hindi abroad on 19th April 2016.
 
A passionate teacher and an accredited Translator and Interpreter, Mrs. Sneh Thakore who has spent most of her life in UK and Canada teaching and writing about Hindi and Indian culture, has She has been editor and publisher of 'Vasudha' a Hindi literary magazine (since Jan.2004), Director - International R. C. University (Canada Chapter), Chair Person Canada: World Forum of Dialogue She has contributed essays, poetry, reports and short stories regularly in Sarita, a well-read bi-monthly Hindi magazine, published by Delhi Press, India. Wrote a colomn for them "Sagar Paar Bharat".
 
Also, she has published in Griha Shobha, Sushma, Mukta, Suman Saurabh, Kadambini, Bhasha-Setu, Samarlok, Richa, Pahchan, Gurjar Rashtraveena, Deepjyoti, Aadhunik avam Hindi Katha-Sahitya mein Nari ka Badalta Swaroop, Nautarni, Pratinidhi Apravasi Hindi Kahaniyan, Gagnanchal, Lekhni, Bal Sakha, Rashtra Bhasha, Purvai, Vichar Drishti, Naya Suraj and Yuddhrat Aadmi, Vishva Hindi Pattrika 2011 & 2014, Aksharam Smarika 2012, Antarrashtriy Parisanvad, Prabhat Khabar, Garbhnal, The Gaursons Times, Virat Bharat, Deshantar, etc. - a mix of International Publications. She has been very active in promoting Indian literature in North America, and he has published in the United States of America in publications such as Shadows and Light, Portraits of Life, The Ebbing Tide, Best Poems Of The 90's, The National Library of Poetry, The Poet's Corner, The Sands of Time, Vishva Vivek, Vishwa and Saurabh. He has locally and nationally published in the Hindu Dharma Review, Kavya Kinjalk, The International Hindi Smarika, Pravasi Kavya, Hindu Chetna, Sangam, Seva Bharti, Namaste CANADA, Medhavini and Hello Canada, Kaavya-Vrishti, Bouchar, Kaavya-Heerak, Kaavya-Dhara, Beautiful Moments, among others.

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अहमदाबाद राष्ट्रीय पुस्तक मेला

Ahmadabad book fair

अहमदाबाद राष्ट्रीय पुस्तक मेला पहली मई से साबरमती रीवर फ्रंट पर शुरू हुआ। इस मेले में अहमदाबाद बुक क्लब के सौजन्य से author's corner के मंच पर 6 मई 2016 के दिन अपनी पुस्तक ‘हथेलियों में सूरज’ को गुजरात की धरा पर लोकार्पण करने और अपनी साहित्यिक यात्रा के बारे में बताने का सुअवसर प्राप्त हुआ। सुखद आश्चर्य यह है कि चिलचिलाती धूप में भी बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए थे।

मुख्य अतिथि के रूप में सहजानंद महाविद्यालय,अहमदाबाद के भूतपूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ.घनानंद शर्मा ’जदली’, विशिष्ठ अतिथि रूप में मदन मोहन मालवीय महाविद्यालय, गुजरात विद्यापीठ की प्राचार्या डॉ. मालती दुबे तथा गुजरात विद्यापीठ के भूतपूर्व भाषा निदेशक स्व.डॉ. अम्बाशंकर नागरसा. की धर्मपत्नी, (हमारी मम्मीजी) ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढाई. अहमदाबाद की महिला बहुभाषी साहित्यकार संस्था ‘अस्मिता’ की सदस्याओं ने भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहकर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए.

अहमदाबाद बुक क्लब की संस्थापिका सुश्री खुर्शीद बहिन और संचालक श्री करण खन्ना, सदस्य नेहा भट्ट का सहयोग भी अप्रतिम रहा। इस कार्यक्रम की कुछ झलकियाँ मंजु महिमा के सौजन्य से प्रस्तुत हैं।   

 

मंजु महिमा के सौजन्य से 

सम्पर्क-+91 9925220177   

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हिन्दी या अन्य भारतीय भाषाओं का ऑनलाइन प्रयोग

 

online community

बहुत ही दुखद स्थिति है कि विश्व पटल पर हिन्दी बोलने वालों की संख्या दूसरे या तीसरे स्थान पर हैं, लेकिन हिन्दी या कोई और भारतीय भाषा का ऑनलाइन प्रयोग करने वालों की संख्या बहुत ही कम है। क्या हम कभी इस डिजिटल विभाजन को दूर कर पाएंगे ?

 

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Professional Development Workshop for Academics, Translators and Language Professionals held on Oct 31, 2015

Group-photoGiven that Internet boom has made Globalization phenomenon a reality. The nations of the world have been unified through it and it has virtually dissolved cultural and racial boundaries. People of different languages are now able to communicate effectively, as the language barrier does not exist in the internet. This has been made possible by language translation, which has made internet content universal and comprehensible to an unlimited number of people. That is why the demand for translators online is rapidly increasing. A huge number of websites now search for skilled translators to increase and improve their visibility and traffic in the internet world.

Therefore, this profession needs one to have many qualifications in order to become a competent full-fledged translator. If a translator wants to keep pace with the dynamics of these changes, he/she must develop not only academic credentials but he/she must also learn new techniques of Business Development, Online Marketing, Social Media Marketing, Project Management and evolve has Entrepreneur by making full use of open sources that are readily available at a very a low cost or mostly free.  

Considering the need to bridge this gap, a full day Professional Development Workshop for Academics, Translators and Language Professionals scheduled on Oct 31, 2015 was held successfully where 20 plus participants from all over India participated and benefited on subject areas related to Business Development, Online Marketing, Social Media Marketing, Project Management and Entrepreneurship.

 Organizers: Indian Translators Association, Modlingua Group and Hindi Center.  More such events will be organized in near future as well.

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A tribute to Dr Kalam, one of the greatest humans of modern India

Kalam

वर्तमान भारत के महामानव डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि (English version follows below) 

मिसाइल मैन के नाम से मशहूर भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भारतीय प्रबंध संस्थान, शिलॉंग में आयोजित एक सेमिनार के दौरान दिल का दौरा पड़ जाने के बाद मेघालय की राजधानी के बेथनी हॉस्पिटल में 27 जुलाई, 2015 की शाम अंतिम साँसें लीं।

 

दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु के एक गरीब परिवार में 15 अक्टूबर 1931 को जन्मे अब्दुल कलाम एक विख्यात वैज्ञानिक बने जिन्होंने भारत के प्रथम उपग्रह प्रक्षेपण यान के विकास की नींव रखी और मिसाइलों और रणनीतिक तकनीकों की स्वदेशी क्षमता का विकास किया तथा भारत को मिसाइल और राकेट प्रक्षेपण तकनीक के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर ला खड़ा किया।

 

डॉक्टरेट की 30 से अधिक मानद उपाधियों के साथ-साथ डॉ. कलाम को पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत रत्न जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया । विज्ञान के क्षेत्र में अपने कर्तव्य के निर्वाह के अलावा उनका ज्यादातर समय भारत के युवाओं के साथ बीता और वे उन्हें देश का योग्य नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते रहे ।

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में,

 “डॉ.कलाम को लोगों के बीच रहना पसंद था; लोग और विशेषकर युवा उन्हें प्यार करते थे। वे विद्यार्थियों को प्यार करते थे और उन्होंने अपने आखिरी क्षण उनके बीच बिताये।“

 आज जब भारत और दुनिया माटी के इस सपूत के लिए शोकमग्न है, हिंदी सेंटर प्रतिभाओं को सँवारने के उनके सिद्धांतों पर काम करता रहेगा।

 कलाम के शब्दों में,

 "मेरा दृढ़ विचार है कि अगर किसी देश को भ्रष्टाचारमुक्त होना है और चमकती प्रतिभाओं वाला देश बनना है, तो इस बदलाव की कुंजी समाज के तीन सदस्यों के हाथ है। ये तीन लोग हैं, माता, पिता और शिक्षक।“

 डॉ. कलाम की स्वप्नदर्शिता में हिंदी सेंटर का दृढ़ विश्वास है।

 “स्वप्न वह नहीं है जो आप सोते समय देखते हैं बल्कि ये वो चीज़ है आपको सोने नहीं देती।“

 यदि आप चाहें तो नीचे के कमेंट बॉक्स में अपनी श्रद्धांजलि दे सकते हैं।


A tribute to Dr Kalam, one of the greatest humans of modern India

 

The missile man and the former President of India, Dr. A.P.J Abdul Kalam, who suffered massive cardiac arrest while attending a seminar hosted by Indian Institute of Management, Shillong, took his last breath at Bethany Hospital in the capital city of Meghalaya on July 27, 2015 in the evening hours.

 

Born on 15th October, 1931 in a poor family in Tamil Nadu, a southern state of India, Abdul Kalam later became a distinguished scientist who pioneered the development of India’s first satellite launch vehicle and developed indigenous capabilities in missiles and critical technologies that brought India on global map of missile and rocket launching technologies.

 

With more than 30 honorary doctorates, Dr. Kalam received highest civilian honors including Padma Bhushan, Padma Vibushan and Bharat Ratna. Apart from his scientific duties, he spent most of his time with youth of India and motivated them to become worthy citizens of the country. He lived a very simple life and ignited millions of minds of the world.

 

In the words of India’s Prime Minister Shri Narendra Modi, 

 

“Dr. Kalam enjoyed being with people; people and youngsters adored him. He loved students and spent his final moments among them.”

 

While India and the world mourn this son of the soil, Hindi Center will continue to work on his principles of creating beautiful minds. In Kalam’s words,

 

“If a country is to be corruption free and become a nation of beautiful minds, I strongly feel there are three key societal members who can make a difference. They are the father, the mother and the teacher”.

 

Hindi Center strongly believes in Dr. Kalam’s way of dreaming. 

 

“Dreams is not what you see in sleep, it is the thing that does not let you sleep”

 

Hindi Centre pays tribute to this greatest human of India and prays for the departed soul's eternal peace.

 

You may also like to pay your tribute by using the comment box below.

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जीवन में छोटे अवकाश का महत्व

 
 

जीवन में छोटे अवकाश का महत्व 

Ravi Kumarएक लकड़हारे युवक की कहानी है। लकड़हारा काफी मेहनती था। वह दिन में अवकाश के समय भी काम करता रहता और उन बुज़ुर्ग लोगों से उसे शिकायत रहती कि वे दिन में कई बार कुछ न कुछ पीने और गप्प हांकने के लिए बेवजह काम रोक कर समय नष्ट करते हैं। जैसे जैसे समय बीतता गया, उस युवा ने गौर किया कि हालांकि वह निरंतर बिना रुके अवकाश के समय भी काम करता है और शायद ही कभी आराम करता हो, इसके बाबजूद बाकी के बुजुर्ग लोग उतने ही पेड़ काट रहे थे बल्कि कई बार तो उससे भी ज्यादा काट डालते थे। ऐसा लगता था कि वे बुजुर्ग उसी की भाँति अवकाश के समय भी काम करते रहे हों इसलिए उसने तय किया कि अगले दिन से अब वह और ज्यादा मेहनत से काम करेगा। दुर्भाग्य से इसका नतीजा और भी खराब निकला।

एक दिन एक बुजुर्ग लकड़हारे ने अवकाश के समय युवा लकड़हारे को अपने साथ कुछ पीने के लिए आमंत्रित किया। उसने इनकार करते हुए कहा कि उसके पास व्यर्थ में नष्ट करने के लिए समय नहीं है। इस पर बुजुर्ग ने मुस्कुरा कर कहा कि अपनी कुल्हाड़ी को दुबारा तेज किए बिना पेड़ काटते रहने से मेहनत बेकार ही जाएगी। देर.सबेर तुम हार मान लोगे या इतनी अधिक मेहनत करते हुए थक जाओगे। 

अचानक ही उस युवा को एहसास हुआ कि वास्तव में अपने अवकाश के समय गप्प हांकते हुए ये बुजुर्ग लकड़हारे अपनी कुल्हाड़ी भी तेज करते हैं। इस तरह वे कम समय और कम मेहनत करते हुए उससे तेजी से ज्यादा लकड़ी काट पाते हैं। 

उस बुजुर्ग लकड़हारे ने बताया कि हमें दक्षता से काम करने की आवश्यकता है, इसके लिए अपनी कुशलता व क्षमताओं का समझदारी से उपयोग करना जरुरी है। तभी हमारे पास बाकी काम करने के लिए ज्यादा समय बचेगा, नहीं तो तुम हमेशा कहते रहोगे कि तुम्हारे पास समय नहीं है! एसीलिए जीवन में छोटे अवकाश का अच्छा खासा महत्व है।

काम के बीच में छोटा सा अवकाश लेने से यह आपको तरो.ताजा महसूस करने, ठीक से सोच सकने और अवकाश के बाद बेहतर काम करने में सक्षम बनाता है। यह नहीं कि मैं अवकाश ले लिए बहाना ढूंढ रहा हूं, अवकाश का अर्थ काम रोकना नहीं, बल्कि आराम से बैठ कर अपनी कार्यनीति या कार्ययोजना पर दूसरे दृष्टिकोंण से पुनर्विचार करना भी है।

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Sneh Thakore

Sneh Thakore

Sneh-thakoreA passionate teacher and an accredited Translator and Interpreter, Mrs. Sneh Thakore who has spent most of her life in UK and Canada teaching and writing about Hindi and Indian culture, joins Hindi Center as Patron. 

She has been editor and publisher of 'Vasudha' a Hindi literary magazine (since Jan.2004), Director - International R. C. University (Canada Chapter), Chair Person Canada: World Forum of Dialogue, Fellow: Research Foundation International, Co-Editor: History of World Hindi Literature, Member of Editorial board Drishti mein Shrishti ‘Dr. Laxmi Mall Singhvi:Digdarshan’ Granth Samiti, Pravasi Today: Contact Person Overseas (Canada), President: Sadbhavna Hindi Sahityik Sanstha (Goodwill Hindi Literary Association), Member of Scarborough Seniors Write Executive Committee, 'Shodh Sanchar Bulletin' Canada advisor, 'Akshar-Varta' Canada advisor, Member of the Scarborough Arts Council, Lyceum Club and Women’s Art Association of Canada (1999-2005), Member of Lively Poet's Society (1997-2003), Executive Member of World Organization of Hindus (2000-2007), Distinguished Member of International Society of Poets, Director of Canadian Council of Hindus (2003-2005), Former Executive Member of Hindi Nagri Pracharini Sabha, Co-Chair of Indian Independence Day Celebration Committee of Markham 2005.

In addition, she has been author of various plays, poetry, short stories, essays, reports, novel, songs, bhajans, gazals etc. in Hindi, English and Urdu, and written in almost all major genre of Hindi literature.

Accomplishments:

  • Kendriya Hindi Sansthan Agra has announced an award for my literary work. This award will be given to me by the Honourable President of India at Rashtrapati Bhavan.
  • Awarded 'Avadh Ratna Award 2015'.
  • Limka Book Record Holder. 'Limka Book of Record' has registered my name as pravasi writer & patrakar, editor-publisher Vasudha Hindi literary magazine.
  • Awarded Sahitya Academy M.P. Akhil Bhartiya 'Veersingh Dev' literary award for 'Kaikeyi Chetna-Shikha' novel.
  • 'International Women Excellence Award 2014’ by U.N. affiliated organisations.     
  • Recipient of a maximum grant from the Dept. of Multiculturalism and Heritage, Ottawa, Canada for the book of plays titled "Anmol Hasya Kshan"(Precious Humorous Moments).
  • International Women Award’ by U.N. affiliated Research Foundation.
  • Awarded four times 'Editor's Choice Award' by The National Library of Poetry, North America.
  • Nominated for the 2003 Poet of the year award.
  • Awarded 'Sahitya Bharti Samman', Delhi, India.
  • Awarded 'Fellowship' by Research Foundation Indira Gandhi Open University, Delhi, India.
  • Vishisht Atithi (Special Guest) at 8th Vishwa Hindi Sammelan (World Hindi Conference) 2007, New YorkU.S.A.
  • Amongst Top 25 Pravasi World Hindi Women Writers selected by 'The Sunday Indians'.
 
Selected list of Books published:
  • Anmol Hasya Kshan (A collection of plays)
  • Jeevan Ke Rang (A collection of poems)
  • Darde-Zuban. (A collection of Urdu poems)
  • Aaj Ka Purush (A collection of short stories)
  • Jeevan Nidhi (A collection of poems)
  • Aatm Gunjan (A collection of philosophical and devotional poems)
  • Has-Parihas (A collection of humorous poems)
  • Jajbaton ka Silsila (A collection of poems)
  • The Galaxy Within (A collection of English poems)
  • Anubhutiyan (A collection of poems)
  • Kavya-Vrishti (An anthology of poems, Contributed, Compiled & Edited) 
  • Purab-Pashchim (A collection of essays on Immigrants)
  • Bauchar (An anthology of poems, Contributed, Compiled & Edited)
  • Kaavya Heerak (An anthology of poems, Contributed, Compiled & Edited)
  • Sanjeevani (A collection of health related essays)
  • Upnishad Darshan (Ishopanishad, philosophical and devotional)
  • Kaavya-Dhara (An anthology of poems, Contributed, Compiled & Edited)
  • Kavyanjali (A collection of poems)
  • Anokha Sathi (A collection of short stories)
  • Kaekeyi : Chetna-Shikha (Novel, Appreciated by The President Secretariat, India. Novel is placed in Rashtrapati Bhavan library, India)
  • Aaj ka Samaj (A collection of social essays)
  • Chintan ke dhagon me Kaikeyi - Sandarbh : Shrimadvalmikiya Ramayan, Shodh-Granth
  • Kaekeyi : Chetna-Shikha (Novel, Awarded by Sahitya Academy M.P. Akhil Bhartiya 'Veer Singh Dev' Award, Second Edition)
  • Kaekeyi : Chintan ke Nav Aayam - Sandarbh : Tulsikrit Shri Ramcharitmanas, Shodh-Granth
  • Lok-Nayak Ram (Novel)

Other Publications and Work:

She has contributed essays, poetry, reports and short stories regularly in Sarita, a well-read bi-monthly Hindi magazine, published by Delhi Press, India. Wrote a colomn for them "Sagar Paar Bharat". Also, she has published in Griha Shobha, Sushma, Mukta, Suman Saurabh, Kadambini, Bhasha-Setu, Samarlok, Richa, Pahchan, Gurjar Rashtraveena, Deepjyoti, Aadhunik avam Hindi Katha-Sahitya mein Nari ka Badalta Swaroop, Nautarni, Pratinidhi Apravasi Hindi Kahaniyan, Gagnanchal, Lekhni, Bal Sakha, Rashtra Bhasha, Purvai, Vichar Drishti, Naya Suraj and Yuddhrat Aadmi, Vishva Hindi Pattrika 2011 & 2014, Aksharam Smarika 2012, Antarrashtriy Parisanvad, Prabhat Khabar, Garbhnal, The Gaursons Times, Virat Bharat, Deshantar, etc. - a mix of International Publications.

She has been very active in promoting Indian literature in North America, and he has published in the United States of America in publications such as Shadows and Light, Portraits of Life, The Ebbing Tide, Best Poems Of The 90's, The National Library of Poetry, The Poet's Corner, The Sands of Time, Vishva Vivek, Vishwa and Saurabh.  He has locally and nationally published in the Hindu Dharma Review, Kavya Kinjalk, The International Hindi Smarika, Pravasi Kavya, Hindu Chetna, Sangam, Seva Bharti, Namaste CANADA, Medhavini and Hello Canada, Kaavya-Vrishti, Bouchar, Kaavya-Heerak, Kaavya-Dhara, Beautiful Moments, among others.

She has even written a play for International Hindi Conference which I also produced, directed and acted in it, titled "Kavivar Ki Durdasha", Burton Auditorium, YorkUniversity, Toronto, Canada. 

Contact Address

Sneh Thakore
16 Revlis Crescent
Toronto, Ontario
M1V 1E9, Canada
Tel: +1-416-291-9534

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हिन्दी बनाम अंग्रेजी

 
 

कुछ मित्रों ने मुझे फिर से सुझाव भेजे कि आप हिन्दी सेंटर चलाते हैं तो सिर्फ हिन्दी में क्यों नहीं लिखते ? आप हिन्दी के आलवा अंग्रेजी और अन्य भाषा में भी क्यों लिखते हो ? इस बात पर मैं अपने विचार प्रकट करना चाहता हूँ।

hindi vs englishमेरे द्वारा संचालित हिन्दी सेंटर का मकसद कोई आंदोलन की शुरुआत करना नहीं है और ही लोगों को जबर्दस्ती समझाना हैकि आप अगर हिन्दी में बोलेंगे तभी राष्ट्रवादी कहलायेंगे। इसका मकसद बहुत ही सरल है।इसका मकसद हिन्दी और भारतीय भाषा और संस्कृति पर शोध को बढ़ावा देना है औरहिन्दी को विदेशी और अहिंदी भाषी लोगों तक पहुंचाना है और अगर इसके लिए अङ्ग्रेज़ी (जिसे हम चाहे माने या माने) और अन्य भाषाओंका प्रयोग जरूरी है। याद रहे कोई अमेरीकन या कोई फ्रांसीसी आपसे हिन्दी में बात तभी करेगा जब आप उससे उसकी भाषा में बात करेंगे। सिर्फ हिन्दी में बात करके हम हिन्दी की सीमा को छोटा कर रहे हैं बल्कि पूरी दुनिया में अपने आप को कुएं का मेढक घोषित कर रहे हैं और इससे दूसरे भाषा के साथ संवाद नहीं होता और हिन्दी सिर्फ हिन्दी भाषियों के बीच सीमित रह जाता है, और ऐसा करना कोई गौरव की बात नहीं।

मुझे इस बात का भी एहसास है कि हिन्दी के लिए हिन्दी माध्यम से लड़ाई कने वालों की संख्या कुछ ज्यादा है, लेकिन हिन्दी के लिए अङ्ग्रेज़ी या अन्य भाषा के माध्यम से उसे बढ़ाने वालों की संख्या के बराबर है। तभी तो आज गिने चुने अङ्ग्रेज़ी बोलने वाले पूरे भारत पर अभी भी राज कर रहे हैं और हमारा हिन्दी भाषी और अन्य 1600 से ज्यादा भाषा बोलने वाला भारतवर्षमूक देखता रहा है।

अगर आप हिन्दी के लिए सचमुच में निष्ठावान हैं तो उन सरकारी महकमे को समझाएँ जो आज भी अंग्रेजीयत के शिकार हैं और जो सिर्फ जनता के पैसे से जीते हैं बल्कि अङ्ग्रेज़ी में पूरा का पूरा कानून बना डालते हैं। इतना ही नहीं आजादी के 68 साल के बाद भी उसी कानून को अङ्ग्रेज़ी में लागू भी करते हैं और जमीन से जुड़े उन हर इंसान को हेय दृष्टि से देखते हैं जो अपनी भाषा और मिट्टी से जुड़ा है।

मुझे बहुत ही पीड़ा महसूस होती है जब कोई हिन्दी को आगे बढ़ाने की बात करे (चाहे जैसे भी हो) तो उसे कोई कोई कारण से हतोत्साहित कर दिया जाता है खास के उन हिन्दी प्रेमियों के द्वारा जो काम कम करते हैं और आलोचना ज्यादा। मैं अङ्ग्रेज़ी में लिखूँ तो फर्क पड़ता है और पूरा भारतीय प्रशासन जब अङ्ग्रेज़ी में नियम और कानून बना डाले और उसे करोड़ों जनता पर थोप दे और उन्ही के पैसे से, तब कोई कुछ नहीं बोलता। माफ कीजिएगा ऐसे हिन्दी प्रेमियों के साथ मेरा मेल नहीं खाता।

हर कोई का अपना अपना नजरिया है। अगर आप अपनी बात सिर्फ हिन्दी में करना चाहते हैं तो जरूर करें वह आपका मूल अधिकार है। मुझे भी अपनी बात रखने का उतना ही अधिकार है जितना आपको मुझे मेरे मौलिक अधिकार से क्यों वंचित रखना चाहते हो ?

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